दिल्ली में प्लास्टिक कचरे की गंभीर समस्या से निपटने और राजधानी को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक अभिनव पर्यावरण नीति पर काम कर रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और पर्यावरण विभाग द्वारा ‘डिपॉजिट रिफंड स्कीम’ (Delhi Deposit Refund Scheme – DRS 2026) का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित योजना के तहत जब कोई उपभोक्ता पानी या कोल्ड ड्रिंक की प्लास्टिक बोतल खरीदेगा, तो उसे ₹1 से ₹2 की अतिरिक्त जमा राशि देनी होगी, और खाली बोतल वापस लौटाने पर यह राशि तुरंत वापस मिल जाएगी।
यह योजना ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ (Use and Throw) की संस्कृति को खत्म करने तथा बोतलों के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देने के लिए तैयार की जा रही है। वर्तमान में यह योजना एक नीतिगत प्रस्ताव (Proposal) के रूप में है, जिसे जल्द ही दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उच्च फुटफॉल वाले क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की योजना बनाई गई है।
Delhi Deposit Refund Scheme 2026: मुख्य विवरण
योजना की पृष्ठभूमि और दिल्ली में क्यों पड़ी जरूरत
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रतिदिन 11,000 टन से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 1,000 टन से ज्यादा केवल प्लास्टिक कचरा होता है। पानी की बोतलें, सॉफ्ट ड्रिंक्स के पीईटी (PET) कंटेनर और डिब्बे उपयोग के तुरंत बाद सड़कों, नालियों और पार्कों में फेंक दिए जाते हैं। यह प्लास्टिक कचरा नालों को अवरुद्ध करता है, यमुना नदी को प्रदूषित करता है और अंततः गाजीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे लैंडफिल पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ाता है।
प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अंतर्गत एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) को प्रभावी बनाने के लिए डिपॉजिट रिफंड स्कीम सबसे सफल वैश्विक मॉडल माना जाता है। इस योजना से नागरिकों में अपनी खाली बोतलें सही जगह लौटाने की आर्थिक प्रेरणा पैदा होगी।
योजना कैसे काम करेगी: डिपॉजिट और रिफंड का पूरा चक्र
डिपॉजिट रिफंड स्कीम की कार्यप्रणाली बेहद पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम होगी:
- 1. खरीद के समय अतिरिक्त जमा: जब कोई ग्राहक दुकान से बोतलबंद पानी या कोल्ड ड्रिंक खरीदेगा, तो एमआरपी (MRP) के अलावा ₹1 या ₹2 की अतिरिक्त रिफंडेबल सिक्योरिटी राशि जुड़ेगी।
- 2. डिजिटल क्यूआर कोड टैगिंग: प्रत्येक बोतल पर एक विशेष डिजिटल क्यूआर कोड या बारकोड प्रिंट होगा, जिससे यह ट्रैक किया जा सके कि बोतल किस निर्माता की है और उस पर डिपॉजिट जमा है।
- 3. खाली बोतल लौटाना: पेय समाप्त होने के बाद ग्राहक अपनी खाली बोतल को नजदीकी रिवर्स वेंडिंग मशीन (RVM) या अधिकृत कलेक्शन सेंटर में डालेगा।
- 4. तत्काल रिफंड: मशीन बोतल के बारकोड को स्कैन करेगी और तुरंत ग्राहक के यूपीआई (UPI), पेटीएम/वॉलेट या डिस्काउंट कूपन के माध्यम से जमा ₹1 से ₹2 वापस लौटा देगी।
रिवर्स वेंडिंग मशीनें और कलेक्शन सेंटर्स
नागरिकों की सुविधा के लिए दिल्ली के व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर मशीनें और केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है:
- दिल्ली मेट्रो स्टेशन: सभी प्रमुख और इंटरचेंज मेट्रो स्टेशनों के कॉनकोर्स एरिया में ऑटोमैटिक RVM मशीनें लगेंगी।
- बस टर्मिनल एवं रेलवे स्टेशन: कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे उच्च आवागमन वाले केंद्रों पर।
- पर्यटन स्थल एवं ऐतिहासिक स्मारक: इंडिया गेट, लाल किला, कुतुब मीनार, चिड़ियाघर और कर्तव्य पथ जैसे स्थानों पर जहां प्लास्टिक बोतलों का भारी कचरा होता है।
- प्रमुख बाजार एवं शॉपिंग मॉल: कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, सरोजिनी नगर, लाजपत नगर और प्रमुख मॉलों के फूड कोर्ट्स में।
- किराना स्टोर व कबाड़ नेटवर्क: स्थानीय खुदरा दुकानदारों और सफाई मित्रों को भी इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि वे भी बोतलें जमा कर कमीशन कमा सकें।
अन्य राज्यों के सफल मॉडल्स से सीख
दिल्ली सरकार इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले देश के अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित मॉडल्स का अध्ययन कर रही है:
- उत्तराखंड (केदारनाथ यात्रा मार्ग): रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने केदारनाथ ट्रेक पर क्यूआर कोड आधारित डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया है, जहां पानी की बोतल लौटाने पर ₹10 वापस मिलते हैं। इससे यात्रा मार्ग पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त हुआ है।
- हिमाचल प्रदेश: शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पहाड़ी पर्यटन शहरों में रिवर्स वेंडिंग मशीनों द्वारा प्लास्टिक कचरे को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया है।
- गोवा: तटीय पर्यटन क्षेत्रों में समुद्र तटों को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए बोतल वापसी अभियान चलाए जा रहे हैं।
पर्यावरण और जनता को होने वाले 5 बड़े लाभ
- 1. प्लास्टिक मुक्त शहर: सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर खाली बोतलों का इधर-उधर फेंकना बंद होगा।
- 2. नालों और यमुना की सुरक्षा: नालियों में प्लास्टिक फंसने से होने वाले जलभराव और यमुना में बहने वाले प्रदूषण में भारी कमी आएगी।
- 3. उच्च गुणवत्ता का पुनर्चक्रण: अलग से एकत्र की गई साफ पीईटी बोतलें रीसाइक्लिंग उद्योग को बेहतरीन कच्चा माल प्रदान करेंगी।
- 4. नागरिकों को आर्थिक लाभ: पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ नागरिकों का जमा पैसा उन्हें तुरंत वापस मिलेगा।
- 5. कचरा बीनने वालों को आजीविका: लावारिस पड़ी बोतलों को जमा करके गरीब तबके के लोग और सफाई मित्र अतिरिक्त दैनिक आय कमा सकेंगे।
